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Patna News: छह साल के आदित्य ने छेड़ी इंसाफ की लड़ाई, माता-पिता के लिए पटना हाईकोर्ट पहुंचा; PM मोदी से मिलने की भी इच्छा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना में अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान वायरल हुआ छह वर्षीय आदित्य अब अपने माता-पिता के लिए न्याय की मांग कर रहा है। बच्चा बड़ा होकर जज बनना चाहता है।

पटना, 28 अगस्त। पटना में 25 अगस्त को अभ्यर्थियों के लोकभवन मार्च के दौरान एक छह साल का बच्चा अचानक चर्चा में आ गया। बैरिकेडिंग के बीच पुलिस अधिकारियों से सवाल करता उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। अब यही बच्चा अपने माता-पिता के साथ कथित ज्यादती का न्याय पाने की जिद लेकर पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है।

पहली कक्षा में पढ़ने वाले इस बच्चे का नाम आदित्य कुमार है। उसका कहना है कि उसके माता-पिता के साथ गलत हुआ है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। आदित्य की उम्र भले ही सिर्फ छह साल है, लेकिन अपने परिवार के लिए सवाल उठाने का उसका अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है।

प्रदर्शन के बाद सामने आया आदित्य का अलग चेहरा

25 अगस्त को अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान आदित्य अपने माता-पिता के साथ मौके पर पहुंचा था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। इसी दौरान आदित्य पुलिस अधिकारियों से सवाल करता दिखाई दिया।

मीडिया कैमरों के सामने भी उसने बेझिझक अपनी बात रखी। इसके बाद उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और देखते ही देखते वह चर्चा में आ गया।

आदित्य का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान उसे पुलिस ने करीब आठ घंटे तक थाने में रखा। परिवार की ओर से पुलिस पर माता-पिता के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब हाईकोर्ट पहुंचा छह साल का बच्चा

अपने माता-पिता के लिए न्याय की मांग करते हुए आदित्य गुरुवार को पटना हाईकोर्ट पहुंचा। वह अपने स्तर पर कानूनी कार्रवाई की कोशिश करता नजर आया।

उसका कहना है कि वह अपने मां-बाप के साथ हुई कथित ज्यादती को लेकर न्याय चाहता है। इतनी कम उम्र में अदालत पहुंचने की उसकी कोशिश ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

आदित्य की बातों में एक और इच्छा सामने आई है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाहता है। उसने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए ईमेल भेजने की बात भी कही है। उसका कहना है कि वह प्रधानमंत्री से बिहार और यहां के लोगों की परेशानियों के बारे में बात करना चाहता है।

पिता दिहाड़ी मजदूर, मां घरेलू कामगार

आदित्य का परिवार आर्थिक रूप से बेहद सामान्य स्थिति में है। उसके पिता रंजीत कुमार दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उन्हें एक दिन काम करने पर करीब 500 रुपये की मजदूरी मिलती है।

वहीं उसकी मां मुन्नी कुमारी दूसरे लोगों के घरों में बर्तन और साफ-सफाई का काम करती हैं। परिवार के अनुसार उनकी आमदनी करीब 2,000 रुपये प्रतिमाह है।

सीमित आमदनी के बावजूद माता-पिता अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं। पिता का कहना है कि आदित्य बचपन से ही पढ़ाई और आसपास की घटनाओं को लेकर काफी जिज्ञासु रहा है।

दूसरों की परेशानी देखकर बेचैन हो जाता है आदित्य

रंजीत कुमार के मुताबिक आदित्य की आदत सामान्य बच्चों से कुछ अलग है। वह टीवी या समाचार में किसी परेशान व्यक्ति की कहानी देखता है तो उसके बारे में सवाल करने लगता है।

गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा था। आदित्य ने प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों को देखा तो वहां जाने की जिद करने लगा। परिवार ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसकी जिद के बाद माता-पिता उसे अपने साथ प्रदर्शन स्थल पर ले गए।

पिता के अनुसार उन्हें अंदाजा नहीं था कि वहां उनका बेटा पुलिस अधिकारियों से सीधे सवाल करने लगेगा।

प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के घायल होने की बात सामने आने के बाद आदित्य भावुक हो गया। इसके बाद उसने पुलिस अधिकारियों से सवाल किए। इसी दौरान रिकॉर्ड हुए वीडियो ने उसे सोशल मीडिया पर चर्चा में ला दिया।

पढ़ाई में भी आगे रहना चाहता है आदित्य

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद आदित्य के माता-पिता उसकी पढ़ाई को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। पिता की इच्छा थी कि बेटे का दाखिला केंद्रीय विद्यालय में हो, लेकिन वहां दाखिला नहीं हो सका।

परिवार ने कई लोगों से मदद मांगी। इसी दौरान उनकी मुलाकात पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव से हुई। परिवार के अनुसार पप्पू यादव की मदद से आदित्य का दाखिला संत पॉल इंटरनेशनल स्कूल में हुआ और उसकी स्कूल फीस का खर्च भी वही उठा रहे हैं।

यह मदद परिवार के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है, क्योंकि दिहाड़ी मजदूरी और घरेलू काम से होने वाली सीमित आमदनी में बच्चे की बेहतर शिक्षा का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल था।

रोजाना कई घंटे पढ़ाई, भविष्य में जज बनने का सपना

आदित्य की पढ़ाई को लेकर भी परिवार काफी उम्मीदें रखता है। उसके अनुसार सुबह करीब सात बजे से दोपहर दो बजे तक स्कूल रहता है। घर लौटने और कुछ आराम के बाद वह शाम चार बजे से रात सात बजे तक पढ़ाई करता है।

परिवार के मुताबिक पढ़ाई के साथ उसे किताबें पढ़ने और समाचार देखने में भी रुचि है। भारतीय संविधान और धार्मिक पुस्तकों के प्रति भी उसकी दिलचस्पी बताई जाती है।

आदित्य का सपना बड़ा होकर जज बनने का है। शायद यही वजह है कि इतनी कम उम्र में वह न्याय और अधिकार जैसे विषयों पर सवाल करता दिखाई दे रहा है।

अब परिवार चाहता है कि मामला जल्द सुलझे

आदित्य के पिता चाहते हैं कि उनके परिवार से जुड़े विवाद की निष्पक्ष जांच हो और अगर किसी स्तर पर उनके साथ गलत हुआ है तो उन्हें न्याय मिले। उनका कहना है कि बेटे का पूरा ध्यान उसकी पढ़ाई पर रहना चाहिए।

वहीं छह साल का आदित्य फिलहाल अपने तरीके से माता-पिता के लिए आवाज उठाने की कोशिश कर रहा है। उसकी कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक दिहाड़ी मजदूर परिवार का छोटा बच्चा अपनी मासूम उम्र में ही न्याय और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल आदित्य की वायरल तस्वीर और वीडियो ने बिहार में अभ्यर्थियों के आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम को एक अलग मानवीय पहलू दे दिया है।

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इस कहानी का बड़ा सवाल

छह साल के बच्चे का अदालत तक पहुंचना अपने आप में असामान्य घटना है। आदित्य की कहानी को केवल वायरल वीडियो या उसके सवालों तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा। इसके पीछे एक ऐसा परिवार है जिसकी आर्थिक स्थिति बेहद सीमित है, लेकिन वह अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना देखता है।

दूसरी ओर, पुलिस पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उनकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकती है। किसी भी घटना में आरोप और प्रमाण के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। यदि परिवार के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

आदित्य का जज बनने का सपना उसकी उम्र से कहीं बड़ा है। उसकी जिज्ञासा और पढ़ाई के प्रति रुचि को सही दिशा और सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। एक छह साल के बच्चे को न्याय की लड़ाई में अकेले आगे बढ़ने के बजाय उसके परिवार, कानूनी व्यवस्था और समाज से संरक्षण मिलना चाहिए।

सबसे बड़ी जरूरत यही है कि विवाद का समाधान कानून और निष्पक्ष जांच के रास्ते से हो, ताकि आदित्य फिर से अपनी किताबों और अपने सपनों की दुनिया में लौट सके।

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